
कहते हैं कि जिस घर में तुलसी का पौधा बिना किसी विशेष श्रम के बढ़ता है, वहां सुख, समृद्धि, शांति और संपन्नता रहती है। यही नहीं अगर भवन में कोई वास्तु दोष भी हो तो वह भी दूर हो जाता है। भारतीय धर्म और संस्कृति में तुलसी को खासा महत्व दिया गया है। शास्त्रानुसार भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है। प्रसाद के साथ तुलसी दल का प्रयोग शुभ फलदायी माना गया है। तुलसी में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के साथ-साथ त्रिदेवी महालक्ष्मी, महाकाली तथा सरस्वती का वास होता है। नारद पुराणमें कहा गया है कि तुलसी के पौधे पर जल अर्पित करने वाला, तुलसी के पौधे के मूल भाग की मिट्टी का तिलक लगाने वाला, तुलसी के चारों ओर कांटों का आवरण या चारदीवारी बनाने वाला और तुलसी के कोमल दलों से भगवान विष्णु के चरण कमलों की पूजा करने वाला मनुष्य जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर विष्णु लोक को प्राप्त होता है। ब्राह्मणों को कोमल तुलसी दल अर्पित करने वाले मनुष्य को तीन पीढिय़ों के साथ ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है इसलिए तुलसी लगाते समय पवित्रता का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए। अपवित्र अथवा दूषित स्थान पर तुलसी लगाने से दोष होता है। तुलसी के पौधे को कभी भी जूठे और गंदे हाथों से स्पर्श नहीं करना चाहिए। घर में तुलसी का पौधा सदैव पूरब अथवा उत्तर दिशा में ही लगाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा में तुलसी लगाना दोषपूर्ण है। तुलसी में जो भी खाद और पानी दिया जाए वह शुद्ध एवं पवित्र हो। तुलसी के पौधे से तुलसी दल लेते समय जूते या चप्पल न पहनें तथा मन में शुद्ध भाव रखते हुए तुलसी को हाथ जोड़कर प्रणाम करके ही तुलसी दल तोड़ें। सूर्य देवता के अस्त होने के बाद घर में किसी का जन्म या मृत्यु होने पर सूतक के दौरान संक्रांति, अमावस्या, द्वदशी और रविवार के दिन तुलसी के पत्ते नहीं लेने चाहिए। घर में लगी हुई तुलसी पर नियमित रूप से जल अर्पित करने तथा प्रात: सायं दीपक प्रज्ज्वलित करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। बरसात के मौसम में या अत्यधिक सर्दी में प्राय: लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में तुलसी अचूक औषधि साबित हो सकती है। रोज तीन या पांच पत्ते (किसी वैद्य के परामर्श से) सुबह खाली पेट लेने से कई रोग आपके नजदीक नहीं आएंगे। इसके अलावा सर्दियों में चाय में तुलसी के पत्ते डालकर पीने से खांसी जुकाम जैसी समस्याओं से दूर रहा जा सकता है। तुलसी के नियमित सेवन से सांस संबंधी रोग होने की आशंका नहीं होती। इससे दमा, टीबी जैसे रोगों में भी लाभ होता है। प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में भी तुलसी के अनेक गुण बताए गए हैं। अगर दांत में दर्द हो रहा है तो तुलसी, लौंग व काली मिर्च को पीसकर उसकी गोली बना लें। इसे उस दांत के नीचे रख लें जिसमें दर्द हो रहा है। कुछ हीदेर में दर्द से निजात मिल जाएगी।
अगर आपके बाल काफी झड़ रहे हैं या कम उम्र में ही सफेद हो रहे हैं तो इसमें तुलसी काफी लाभदायक है। इसके लिए तुलसी के कुछ पत्ते लीजिए। उन्हें आंवले के साथ बारीक पीस लीजिए। नहाने से पहले इस पाउडर को पानी में उबाल लें और उससे नहाएं। वह प्रयोग बालों का झडऩा रोकता है। इसे दो महीने तक जारी रखें। तुलसी का सेवन करते समय कुछ सावधानियों का पालन करना भी जरूरी है अन्यथा लाभ के बजाय हानि हो सकती है। तुलसी का सेवन करते समय कुछ सावधानियों का पालन करना भी जरूरी है अन्यथा लाभ के बजाय हानि हो सकती है। तुलसी का सेवन करने के तुरंत बाद दूश नहीं पीना चाहिए। तुरंत दूध का सेवन आपको कई रोग दे सकता है। हालांकि कुछ औषधियों में तुलसी का उपयोग होता है और उनका सेवन भी दूध के साथ किया जाता है। लेकिन सिर्फ तुलसी के सेवन के बाद दूध पीना रोगकारक माना गया है। तुलसी दल या तुलसी रस लेने के बाद पान नहीं खाना चाहिए। खासतौर से कार्तिक मास में ऐसा करना पेट व रक्त संबंधी कई रोग उत्पन्न कर सकता है।